✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦

उपासक

  • पुण्य

    पुण्य

    📂 ग्रन्थ

    पुण्य ‘धर्म की नींव’ है। पुण्य ‘सुख की इमारत’ है। पुण्य ‘मुक्ति की सीढ़ी’ है। इस पुस्तक में आप जानेंगे कि धर्म की उस नींव को वर्तमान जीवन में कैसे रखा जाता है। सुख की उस इमारत को भविष्य के लिए कैसे खड़ा किया जाता है। और त्रिकाल दुःखमुक्ति की उस सीढ़ी पर कैसे चढ़ा जाता है।

  • प्रत्येक श्वास के साथ

    प्रत्येक श्वास के साथ

    📂 ग्रन्थ

    थानिस्सरो भिक्षु की यह प्रसिद्ध कृति ध्यान-साधना पर आधारित एक सरल, स्पष्ट और पूरी तरह व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। यह पुस्तक दो भरोसेमंद स्रोतों से प्रेरित है—एक ओर बुद्ध का आनापान, और दूसरी ओर आचार्य 'अजान ली धम्मधरो' की ध्यान-पद्धति। दोनों के मेल से यह ग्रंथ साधक को समाधि और प्रज्ञा विकसित करते हुए …

  • ११. केवट्टसुत्तं

    ११. केवट्टसुत्तं

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    क्या भिक्षुओं के द्वारा चमत्कार दिखाना उचित है, ताकि लोगों में श्रद्धा बढ़ जाएँ? भगवान का इस पर अविस्मरणीय उत्तर।

  • १६. महापरिनिब्बान सुत्त

    १६. महापरिनिब्बान सुत्त

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह पालि साहित्य का सबसे लंबा सूत्र है, जो बुद्ध की परिनिर्वाण कथा को विवरण के साथ बताता है। भगवान बुद्ध के अंतिम दिनों के बारे में यहाँ लंबा ब्योरा मिलता है, जिससे बुद्ध के व्यक्तित्व की गहराई झलकती है।

  • ३१. सिङ्गालसुत्त

    ३१. सिङ्गालसुत्त

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    एक युवा पुरुष अपने मृत पिता के आदेशानुसार व्यर्थ कर्मकांड करता है। किन्तु, बुद्ध उसे उसका गहरा महत्व समझाते हुए गृहस्थों के व्रत और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते है।