✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦

परित्त

  • परित्त

    परित्त

    📂 ग्रन्थ

    जीवन की समस्याएँ दूर करें। सुरक्षा, शांति और मंगल के लिए यहाँ रक्षा-सूत्रों का श्रवण करें। साथ ही, स्वयं मङ्गल पठन करें!

  • २०. महासमय सुत्त

    २०. महासमय सुत्त

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    भगवान बुद्ध का दर्शन लेने के लिए दूसरी दुनियाओं के अनेक देवतागण एकत्र हुए। तब, भगवान ने उनका वर्णन कर, भिक्षुओं का उनसे परिचय कराया।

  • २२. महासतिपट्ठान सुत्त

    २२. महासतिपट्ठान सुत्त

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह साधना करने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है। इस सूत्र में स्मृति स्थापित करने की विधि विस्तार से बतायी गयी है। किन्तु, सति का अर्थ और मकसद क्या है, और वह आतापी के साथ कैसे जुड़ी हुई है, यह समझना अनिवार्य है।

  • ३२. आटानाटियसुत्त

    ३२. आटानाटियसुत्त

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    दुनिया में अनेक तरह के अदृश्य सत्व हैं, और हर कोई हमारा हितकांक्षी नहीं है। कई सत्व हिंसक भी हैं। यह सूत्र रक्षामंत्र के तौर पर उनसे बचने का मार्ग बताता है।