✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦

ब्राह्मण

  • ३. अम्बट्ठसुत्तं

    ३. अम्बट्ठसुत्तं

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    इस तीखी बहस में भगवान घमंडी ब्राह्मण युवक की जाति पुछकर उसकी स्वघोषित श्रेष्ठता को सीधी चुनौती देते है, और अहंकार चूर कर देते है।

  • ४. सोणदण्डसुत्तं

    ४. सोणदण्डसुत्तं

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    क्या जाति से कोई ब्राह्मण होता है या कर्म से? भरी ब्राह्मणी सभा में हुई इस ज्वलंत संवाद में भगवान ब्राह्मणों को ‘ब्राह्मणत्व’ की परिभाषा समझाकर हलचल मचा देते है।

  • ५. कूटदन्तसुत्तं

    ५. कूटदन्तसुत्तं

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    महायज्ञ की अभिलाषा लिए सैकड़ों ब्राह्मणों संग आए कूटदंत को भगवान सबसे प्राचीन और सबसे फलदायी यज्ञ-पद्धति उजागर कर बताते हैं—एक ऐसा यज्ञ, जिसमें हिंसा त्यागकर जरूरतमंदों की सहायता की जाए।

  • १२. लोहिच्चसुत्तं

    १२. लोहिच्चसुत्तं

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    क्या किसी की अध्यात्मिक सहायता नहीं करनी चाहिए? एक ब्राह्मण की दृष्टि का भगवान निवारण करते हैं।