✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦

मार्गदर्शिका

  • सम्बोधि क्या है?

    सम्बोधि क्या है?

    📂 लेख

    दुनिया के अधिकतर धर्म 'विश्वास' पर टिके हैं। वे कहते हैं—'इस किताब पर भरोसा करो,' या 'ईश्वर पर भरोसा करो।' लेकिन बुद्ध का धम्म 'खोज' पर टिका है।

  • सम्बोधि इतिहास

    सम्बोधि इतिहास

    📂 लेख

    बुद्ध के समय का जम्बूद्वीप (भारत) केवल ऋषियों की भूमि नहीं थी, बल्कि एक 'बौद्धिक युद्धक्षेत्र' था। गणित और खगोलशास्त्र की नई खोजों ने लोगों की नींद उड़ा दी थी।

  • गोतम बुद्ध एक विस्मृत महामानव

    गोतम बुद्ध एक विस्मृत महामानव

    📂 लेख

    भारत के इतिहास ने हमें कई राजा दिए, कई योद्धा दिए, और कई दार्शनिक दिए। किन्तु 'तथागत' केवल एक ही दिया...

  • सिद्धार्थ गोतम का जन्म

    सिद्धार्थ गोतम का जन्म

    📂 लेख

    कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन और रानी महामाया के घर जिस बालक का जन्म हुआ, वह कोई साधारण संयोग नहीं था। प्रारंभिक सूत्र इस जन्म को एक सामान्य मानवीय घटना के रूप में नहीं, बल्कि एक 'अच्छरियब्भुत' (आश्चर्यजनक अद्भुत घटना) के रूप में याद करते हैं।

  • सिद्धार्थ गोतम की गृहस्थी और संवेग

    सिद्धार्थ गोतम की गृहस्थी और संवेग

    📂 लेख

    आइए, अब उस राजमहल के भीतर चलते हैं जहाँ राजकुमार सिद्धार्थ का युवावन खिल रहा है—सुखों के सागर में, लेकिन एक अजीब सी प्यास के साथ।

  • गोतम बुद्ध का महाभिनिष्क्रमण

    गोतम बुद्ध का महाभिनिष्क्रमण

    📂 लेख

    राजकुमार सिद्धार्थ का अब मखमल छूट गया था, और सामने थी अनजानी राह। न कोई गुरु, न कोई नक्शा, केवल एक धधकती हुई जिज्ञासा। आइए, देखते हैं उस महात्याग के बाद के पहले कदम।

  • गोतम बुद्ध की दुष्कर चर्या

    गोतम बुद्ध की दुष्कर चर्या

    📂 लेख

    इतिहास का सबसे कठिन अध्याय—जहाँ एक मनुष्य ने अपने शरीर को मिटा देने की हद तक जाकर सत्य को ललकारा।

  • सिद्धार्थ को मध्यम मार्ग मिलना

    सिद्धार्थ को मध्यम मार्ग मिलना

    📂 लेख

    शरीर के दमन का मार्ग व्यर्थ सिद्ध हो चुका था। अब सिद्धार्थ ने एक नई दिशा पकड़ी। यह दिशा थी—चित्त की साधना। अब उनका संघर्ष 'शरीर' से नहीं, बल्कि 'मन' की गहराइयों से था।

  • गोतम बुद्ध का बुद्धत्व लाभ

    गोतम बुद्ध का बुद्धत्व लाभ

    📂 लेख

    उरुवेला की उस रात, नेरञ्जरा नदी के तट पर इतिहास बदलने वाला था। सिद्धार्थ गौतम 'मध्यम मार्ग' को पा चुके थे, शरीर में बल लौट आया था, और मन एक धारदार हथियार की तरह तैयार था।

  • गोतम बुद्ध की संबोधि के पश्चात

    गोतम बुद्ध की संबोधि के पश्चात

    📂 लेख

    युगों से चला आ रहा महायुद्ध समाप्त हो चुका था। जिस 'मार' ने देवताओं तक को अपने पाश में बांध रखा था, वह परास्त हो चुका था। अविद्या का घना कोहरा छंट चुका था और उरुवेला के वनों में अब केवल एक ही स्वर गूँज रहा था—परम शांति।

  • बुद्ध का क्रमिक उपदेश - अनुपुब्बिकथा

    बुद्ध का क्रमिक उपदेश - अनुपुब्बिकथा

    📂 लेख

    बुद्ध ने कभी धर्म को एक ही साँचे में नहीं ढाला। वे श्रोता की क्षमता, उसकी जिज्ञासा और उसके मन की स्थिति को ध्यान में रखकर ही, क्रमबद्ध रूप से, धर्म को प्रकट करते—इसी को 'अनुपुब्बिकथा' कहा गया है।

  • भिक्षु का क्रमिक प्रशिक्षण

    भिक्षु का क्रमिक प्रशिक्षण

    📂 लेख

    आध्यात्मिक विकास कोई जोशीला और आवेगजन्य निर्णय नहीं, बल्कि जागरूक, क्रमबद्ध, और सूझबूझ से भरी एक यात्रा है। 'अनुपुब्बिसिक्खा', यानी क्रमिक प्रशिक्षण, वह साधना-पथ है जिसे स्वयं बुद्ध ने गढ़ा।

  • क्या बौद्ध धर्म में मिलावट हुई है?

    क्या बौद्ध धर्म में मिलावट हुई है?

    📂 लेख

    आज हम जिसे 'बुद्ध वचन' के रूप में सुनते, पढ़ते और पूजते हैं—क्या वह सचमुच बुद्ध की अपनी वाणी है? या फिर यह सदियों पुरानी परंपराओं और मान्यताओं में लिपटी हुई कोई और गूंज है?

  • क्या मांसाहार पाप है?

    क्या मांसाहार पाप है?

    📂 लेख

    भारत में जब कोई धम्म की शरण में आता है, तो उसके सामने सबसे बड़ी व्यावहारिक दुविधा भोजन को लेकर खड़ी होती है। एक तरफ हमारे मन में हज़ारों सालों का 'शाकाहार ही पवित्रता है' वाला गहरा भारतीय संस्कार है, तो दूसरी तरफ बुद्ध का अहिंसा का सन्देश है।

  • क्या बौद्ध धर्म निराशावादी है?

    क्या बौद्ध धर्म निराशावादी है?

    📂 लेख

    आपने अक्सर सुना होगा कि बौद्ध धर्म एक 'निराशावादी' धर्म है। यह गलतफहमी इतनी गहरी है कि हमारे देश के प्रथम उपराष्ट्रपति और महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भी इसे 'दुःखवाद' के चश्मे से देखने से नहीं बच सके।

  • तर्क बनाम विवेक

    तर्क बनाम विवेक

    📂 लेख

    तर्क आवश्यक है, इसमें कोई संदेह नहीं। लेकिन आधुनिक दुनिया में तर्क एक अतिरंजित और अनिवार्य गुण बन चुका है।

  • पारमिता का मिथक

    पारमिता का मिथक

    📂 लेख

    प्रारंभिक सूत्रों की कसौटी पर देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि पारमि की यह पूरी अवधारणा बुद्ध के मूल वचनों से एक ऐतिहासिक भटकाव है। आइए, इसकी विकास-यात्रा और इसके प्रभावों की पड़ताल करें।

  • निर्वाण का खौफ़

    निर्वाण का खौफ़

    📂 लेख

    हम सभी जानते हैं कि जब दीये की लौ बुझती है तो क्या होता है—अग्नि शांत होकर खत्म हो जाती है। इसलिए जब हमें पता चलता है कि बौद्ध साधना का अंतिम लक्ष्य 'निर्वाण' है—जिसका शाब्दिक अर्थ है 'बुझ जाना'—तो मन में एक सिहरन दौड़ जाती है।

  • अरिय सङ्घ १

    अरिय सङ्घ १

    📂 लेख

    विचरण करों, भिक्षुओं—बहुजनों के हित के लिए, बहुजनों के सुख के लिए, इस दुनिया पर उपकार करते हुए, देव और मानव के कल्याण, हित और सुख के लिए!

  • अरिय सङ्घ २

    अरिय सङ्घ २

    📂 लेख

    विचरण करों, भिक्षुओं—बहुजनों के हित के लिए, बहुजनों के सुख के लिए, इस दुनिया पर उपकार करते हुए, देव और मानव के कल्याण, हित और सुख के लिए!

  • अर्हंत बनाम बोधिसत्व

    अर्हंत बनाम बोधिसत्व

    📂 लेख

    आज १५०० साल बाद, हमारे पास 'बुद्ध के नाम पर खिचड़ी पक चुकी है। थेरवाद, महायान, वज्रयान—सब दावा करते हैं कि वे सही हैं। एक आम साधक कैसे पहचाने कि शुद्ध घी कौन सा है और डालडा कौन सा?

  • त्रिशरण

    त्रिशरण

    📂 लेख

    शरण जाने का अर्थ है—यह स्वीकार करना कि 'मैं अपने विकारों से हार रहा हूँ, और अब मुझे एक ऐसे मार्गदर्शक की आवश्यकता है जिसने इन शत्रुओं को परास्त किया हो।'

  • मूल बुद्ध वचन - चेकलिस्ट

    मूल बुद्ध वचन - चेकलिस्ट

    📂 लेख

    बौद्ध धर्म के इतिहास में 'मूल बुद्ध वचन' और बाद में विकसित हुए 'थेरवाद' के बीच के अंतर को समझना एक संवेदनशील लेकिन आवश्यक यात्रा है।

  • तिसरण

    तिसरण

    📂 लेख

    जीवन की भागदौड़ में अक्सर हम खुद को अकेला, असहाय या उलझन में पाते हैं। बाहर दुनिया का शोर है और भीतर चिंताओं का। ऐसे समय में, हर इंसान एक ऐसी जगह तलाशता है जहाँ उसे गहरी सुरक्षा, शांति और सही दिशा मिल सके। बौद्ध धर्म में उस सुरक्षित स्थान को 'त्रिशरण कहा गया है।

  • त्रिपिटक का परिचय

    त्रिपिटक का परिचय

    📂 सुत्तपिटक

    आज जब हम इन ताड़पत्रों की ओर लौटते हैं, तो हम अपनी खोई हुई विरासत और अपनी जड़ों की ओर लौट रहे होते हैं।