✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦

जाति-वर्ण

  • ३. अम्बट्ठसुत्तं

    ३. अम्बट्ठसुत्तं

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    इस तीखी बहस में भगवान घमंडी ब्राह्मण युवक की जाति पुछकर उसकी स्वघोषित श्रेष्ठता को सीधी चुनौती देते है, और अहंकार चूर कर देते है।

  • ४. सोणदण्डसुत्तं

    ४. सोणदण्डसुत्तं

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    क्या जाति से कोई ब्राह्मण होता है या कर्म से? भरी ब्राह्मणी सभा में हुई इस ज्वलंत संवाद में भगवान ब्राह्मणों को ‘ब्राह्मणत्व’ की परिभाषा समझाकर हलचल मचा देते है।

  • ५. कूटदन्तसुत्तं

    ५. कूटदन्तसुत्तं

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    महायज्ञ की अभिलाषा लिए सैकड़ों ब्राह्मणों संग आए कूटदंत को भगवान सबसे प्राचीन और सबसे फलदायी यज्ञ-पद्धति उजागर कर बताते हैं—एक ऐसा यज्ञ, जिसमें हिंसा त्यागकर जरूरतमंदों की सहायता की जाए।

  • २७. अग्गञ्ञ सुत्त

    २७. अग्गञ्ञ सुत्त

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    दुनिया की शुरुवात कैसे हुई? अनेक पौराणिक कथाओं के बीच, बुद्ध एक भिन्न विवरण देते हैं, जिसमें मानव-कर्म और नैतिकता दुनिया के संतुलन से जुड़ा है।

  • २८. सम्पसादनीयसुत्त

    २८. सम्पसादनीयसुत्त

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    परिनिर्वाण लेने से पूर्व, आयुष्मान सारिपुत्त आकर भगवान से मुलाक़ात करते है, और महान शास्ता के लिए भाव-विभोर बातें कहते है।