हम सभी जानते हैं कि जब दीये की लौ बुझती है तो क्या होता है—अग्नि शांत होकर खत्म हो जाती है। इसलिए जब हमें पता चलता है कि बौद्ध साधना का अंतिम लक्ष्य 'निर्वाण' है—जिसका शाब्दिक अर्थ है 'बुझ जाना'—तो मन में एक सिहरन दौड़ जाती है।