✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦

प्रतीत्य समुत्पाद

  • १. ब्रह्मजालसुत्तं

    १. ब्रह्मजालसुत्तं 📍

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    सुत्तपिटक का पहला सूत्र स्पष्ट करता है कि क्या धर्म ‘नहीं’ है। भगवान इसमें दुनिया के विविध धार्मिक-अधार्मिक मान्यताओं के मायाजाल को तोड़ते हैं।

  • १५. महानिदान सुत्त

    १५. महानिदान सुत्त

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    आयुष्मान आनन्द को लगता है कि उन्होने प्रतीत्य समुत्पाद को गहराई से जान लिया। भगवान उन्हें चेताते हैं कि इतना आत्मविश्वास मत पालो। और, तब दुःख के विविध कारण और निर्भर घटकों का गहराई से वर्णन करते है।