✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦

मिथ्यादृष्टि

  • सम्बोधि इतिहास

    सम्बोधि इतिहास

    📂 लेख

    बुद्ध के समय का जम्बूद्वीप (भारत) केवल ऋषियों की भूमि नहीं थी, बल्कि एक 'बौद्धिक युद्धक्षेत्र' था। गणित और खगोलशास्त्र की नई खोजों ने लोगों की नींद उड़ा दी थी।

  • १. ब्रह्मजालसुत्तं

    १. ब्रह्मजालसुत्तं 📍

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    सुत्तपिटक का पहला सूत्र स्पष्ट करता है कि क्या धर्म ‘नहीं’ है। भगवान इसमें दुनिया के विविध धार्मिक-अधार्मिक मान्यताओं के मायाजाल को तोड़ते हैं।

  • १. मूलपरियाय सुत्त

    १. मूलपरियाय सुत्त

    📂 सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    इस निकाय के पहले ही धमाकेदार सूत्र को सुनकर कोई खुश नहीं हुआ! “क्या ब्रह्मांड का कोई मूल या जड़ है?” भगवान का उत्तर!

  • २. सामञ्ञफलसुत्तं

    २. सामञ्ञफलसुत्तं

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    इस सूत्र में भगवान उजागर करते हैं कि धर्म वास्तव में क्या है। पुर्णिमा की रोमहर्षक रात में राजा अजातशत्रु भगवान के पास पहुँचकर मन की शान्ति पाता है।

  • १२. लोहिच्चसुत्तं

    १२. लोहिच्चसुत्तं

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    क्या किसी की अध्यात्मिक सहायता नहीं करनी चाहिए? एक ब्राह्मण की दृष्टि का भगवान निवारण करते हैं।

  • २३. पायासि सुत्त

    २३. पायासि सुत्त

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    राजा पायासि जिद्दी, भौतिकवादी और नास्तिक था। उसने ‘मरणोपरांत परलोक-वरलोक नहीं होता’ यह साबित करने के लिए बहुत अजीब प्रयोग किए थे। अंततः वह आकर अरहंत भिक्षु कुमार कश्यप से एक मनोरंजन-पूर्ण और यादगार बहस करता है।

  • २४. पाथिक सुत्त

    २४. पाथिक सुत्त

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    सुनक्खत भिक्षु को तमाशेबाज निर्वस्त्र तपस्वियों से आकर्षण है। किन्तु, तप का ऐसा तमाशा न भगवान करते है, न ही उनका भिक्षुसंघ। उसके भिक्षुत्व छोड़ने की बात पर, भगवान उसकी अक्ल ठिकाने लगाने की नाकाम कोशिश करते है।

  • २५. उदुम्बरिक सुत्त

    २५. उदुम्बरिक सुत्त

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह सूत्र विभिन्न धर्मों के बीच होने वाले संवाद का एक बेहतरीन उदाहरण है। बुद्ध का आशय किसी को ‘बौद्ध’ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें दुःखों से मुक्त करना है।

  • २९. पासादिकसुत्त

    २९. पासादिकसुत्त

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    महावीर जैन के निधन होने पर उनके संघ में ‘कत्लेआम’ मचा। उसे सुनकर, बुद्ध अपने संघ में स्थिरता और प्रौढ़ता का भाव व्यक्त करते है। और, भिक्षुओं को संगीति के लिए प्रेरित भी करते है।