✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦

मेत्ता

  • ७. भावना

    ७. भावना

    📂 ग्रन्थ / पुण्य

    जो पुण्यक्रिया के तमाम आधार आपोआप (स्वर्ग में) उत्पन्न कराते हैं, वे ‘मेत्ता चेतोविमुक्ति’ के सोलहवें हिस्से के बराबर भी नहीं हैं। मेत्ता तमाम पुण्यों से आगे बढ़कर अधिक चमकती है, उजाला करती है, चकाचौंध करती है।