✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦

विपाक

  • १. प्रमाद

    १. प्रमाद

    📂 ग्रन्थ / पुण्य

    भिक्षुओं! तीन तरह का नशा होता है। कौन से तीन? यौवन का नशा, आरोग्य का नशा, और जीवन का नशा।

  • ३. पुण्य

    ३. पुण्य

    📂 ग्रन्थ / पुण्य

    “हे गोतम! क्या कारण एवं परिस्थिति से कुछ सत्व मरणोपरांत काया छूटने पर सद्गति होकर स्वर्ग उपजते हैं?”

  • ४. दान

    ४. दान

    📂 ग्रन्थ / पुण्य

    दान-संविभाग के जो फ़ल मुझे पता चले, यदि दूसरों को भी पता चल जाए, तो बिना दिए, बिना बांटे न कभी कोई भोग करेगा, न कंजूसी से मन मलिन होने देगा! भले ही किसी मूंह का आख़िरी निवाला हो, किंतु यदि कोई दानयोग्य मौजूद हो तो वह बिना दिए, बिना बांटे खा नहीं पाएगा।

  • ५. शील

    ५. शील

    📂 ग्रन्थ / पुण्य

    काया से संवर है भला, भला है वाणी से संवर। मन से संवर है भला, भला है सर्वत्र संवर। जो सर्वत्र संवृत शर्मिला, ‘रक्षित’ है कहलाता।

  • पुण्य

    पुण्य

    📂 ग्रन्थ

    पुण्य ‘धर्म की नींव’ है। पुण्य ‘सुख की इमारत’ है। पुण्य ‘मुक्ति की सीढ़ी’ है। इस पुस्तक में आप जानेंगे कि धर्म की उस नींव को वर्तमान जीवन में कैसे रखा जाता है। सुख की उस इमारत को भविष्य के लिए कैसे खड़ा किया जाता है। और त्रिकाल दुःखमुक्ति की उस सीढ़ी पर कैसे चढ़ा जाता है।