✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦

संज्ञा

  • आहार प्रतिकूल संज्ञा

    आहार प्रतिकूल संज्ञा

    📂 लेख

    भगवान कहते हैं—आहार-प्रतिकूल नज़रिए की साधना करना, उसे विकसित करना — महाफ़लदायी, महालाभकारी होता है। वह अमृत में डुबोता है, अमृत में पहुँचाता है। कैसे साधक आहार-प्रतिकूल नज़रिए की साधना करता है?

  • ९. पोट्ठपादसुत्तं

    ९. पोट्ठपादसुत्तं

    📂 सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    एक घुमक्कड़ संन्यासी को भगवान संज्ञाओं की गहन अवस्थाओं के बारे में बताते हैं कि किस तरह वे गहरी ध्यान-अवस्थाओं से उत्पन्न होते हैं।